गणेश चतुर्थी विशेष : जानें इस दिन का महत्व और पूजन विधि !

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गणेश चतुर्थी विशेष : जानें इस दिन का शुभ पूजा मुहूर्त और पूजन विधि !

कागा न्यूज -कौशल सविता
विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहे जाने वाले “भगवान श्री गणेश जी” का जन्मोत्सव 22 अगस्त, शनिवार को देशभर में मनाया जाएगा। इसे विनायक चतुर्थी, कलंक चतुर्थी और डण्डा चतुर्थी आदि जैसे नामों से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है, इसलिए किसी भी शुभ काम को करने से पहले उनकी पूजा की जाती है। माना जाता है कि ऐसा करने से शुरू किया गया काम बिना किसी रुकावट के संपन्न होता है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को “भगवान श्री गणेश जी” का जन्म हुआ था, इसीलिए इस दिन «श्री गणेश चतुर्थी” का पर्व मनाते हैं। “श्री गणेश चतुर्थी” का पर्व दस दिनों तक चलता है, दसवें दिन अनंत चतुर्दशी के साथ इस पर्व की समाप्ति होती है। अनंत चतुर्दशी के दिन “श्री गणेश जी” के विसर्जन के बाद इस दस दिवसीय त्यौहार का अंत होता है। सप्ताह में बुधवार के दिन को “श्री गणेश जी” की पूजा के लिए खास माना जाता है।

“विघ्नहर्ता श्री गणेश जी” को ज़रूर चढ़ाएं ये चीज़ें*
बौद्धिक ज्ञान के देवता कहे जाने वाले “श्री गणपति जी” के आशीर्वाद से व्यक्ति का बौद्धिक विकास होता है। इसीलिए भक्त उनका आशीर्वाद पाने के लिए सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से आराधना करते हैं। भक्त “श्री गणपति जी” की पूजा करते समय छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हैं, ताकि उनसे कोई गलती ना हो जाएँ। लेकिन अक्सर जानकारी न होने के अभाव में वे “भगवान श्री गणेश जी” को ये कुछ चीज़ें चढ़ाना भूल जाते हैं। पहला मोदक का भोग और दूसरा दूर्वा (एक प्रकार की घास) और तीसरा घी। ये तीनों ही “श्री गणपति जी” को बेहद प्रिय हैं। इसीलिए जो भी व्यक्ति पूरी आस्था से “श्री गणपति जी” की पूजा में ये चीज़ें चढ़ाता है तो उस व्यक्ति को “श्री गणेश जी” का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

क्यों चढ़ाते हैं “श्री गणपति जी” को प्रसाद में मोदक?
रिद्धि सिद्धि के देवता “श्री गणपति जी”* के पूजन में प्रसाद के रूप में खासतौर पर मोदक का भोग ज़रूर लगाया जाता है। कहा जाता है कि मोदक “श्री गणपति जी” को बहुत पसंद है। लेकिन इसके पीछे पौराणिक मान्यताएं छिपी हुई हैं। पुराणों के अनुसार “श्री गणपति जी” और परशुराम के बीच युद्ध चल रहा था, उस दौरान “श्री गणपति जी” का एक दाँत टूट गया।

इसके चलते उन्हें खाने में काफी परेशानी होने लगी। उनके कष्ट को देखते हुए कुछ ऐसे पकवान बनाए गए जिसे खाने में आसानी हो और उससे दाँतों में दर्द भी ना हो। उन्हीं पकवानों में से एक मोदक था। मोदक खाने में काफी मुलायम होता है। माना जाता है कि “श्री गणेश जी” को मोदक बहुत पसंद आया था और तभी से वो उनका पसंदीदा मिष्ठान बन गया था। इसलिए भक्त “श्री गणेश जी” को प्रसन्न करने के लिए मोदक का भोग लगाने लगे।

हालाँकि मोदक के विषय में कुछ पौराणिक धर्मशास्त्रों में भी जिक्र किया गया है। मोदक का अर्थ होता है – ख़ुशी या आनंद। “श्री गणेश जी” को खुशहाली और शुभ कार्यों का देव माना गया है इसलिए भी उन्हें मोदक चढ़ाया जाता है।

“श्री गणेश चतुर्थी” के दिन क्यों निषेध है चंद्र दर्शन
ऐसी माना जाता है कि “श्री गणेश चतुर्थी” के दिन चंद्र दर्शन नहीं करना चाहिए, नहीं तो व्यक्ति के ऊपर मिथ्या कलंक यानि बिना किसी वजह से व्यक्ति पर कोई झूठा आरोप लगता है। पुराणों के अनुसार एक बार “भगवान श्रीकृष्ण” ने भी “श्री गणेश चतुर्थी” के दिन चंद्र दर्शन किया था, जिसकी वजह से उन्हें भी मिथ्या का शिकार होना पड़ा था। “श्री गणेश चतुर्थी” के दिन चंद्र दर्शन को लेकर एक और पौराणिक मत है जिसके अनुसार इस चतुर्थी के दिन ही ”भगवान श्री गणेश जी” ने चंद्रमा को श्राप दिया था। इस वजह से ही चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को निषेध माना गया।

“श्री गणेश चतुर्थी” पर इस विधि से करें पूजा
सबसे पहले सुबह उठकर स्नान आदि करें।
उसके बाद “श्री गणेश जी” की तांबे या फिर मिट्टी की प्रतिमा लें।
अब एक कलश में जल भर लें और उसके मुँह को नए से वस्त्र बांध दें। इसके बाद उसके ऊपर “श्री गणेश जी” को विराजमान करें।

“श्री गणेश जी” को सिंदूर, दूर्वा, घी चढ़ाएं और 21 मोदक का भोग लगाकर विधिवत पूजा करें।
अंत में लडडुओं का प्रसाद ग़रीबों और ब्राह्मणों को बाँट दें।
दस दिनों तक चलने वाले “श्री गणेश चतुर्थी” के इस त्यौहार पर आप “श्री गणेश जी” की मूर्ति को एक, तीन, पांच, सात और नौ दिनों के लिए घर पर रख सकते हैं।

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