खत्म हो रही संदना के जंगलों से आयुवैदिक औसधी गुर्च(गिलोय ।

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कागा न्यूज-शिव शंकर सविता
खत्म हो रही जंगलों से आयुवैदिक औसधी

बुखार सहित 70 रोगों में है लाभकारी

गर्भवती महिलाओं को बिना चकित्सक सलाह के इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए।

नही है खरीद,बिक्री का कोई लायसेंस

संदना थाना क्षेत्र के जंगलों,बागों से गुर्च(गिलोय) की बिक्री आज कल जोरो पर है जिसके चलते धीरे धीरे जंगल औसधि मुक्त होते चले जा रहे है लॉकडाउन के दौरान पैसो की किल्लत के चलते गावो के बच्चे बुजुर्ग पैसों के लालच में पूरा पूरा दिन जंगलों,बागों से गुर्च काट काट कर लाते है जिसको लखनऊ की प्राइवेट कंपनियां ओछे दामों में खरीदती है जिसके बाद दवाएं बनाकर ऊंचे दामों में बिक्री करती है।भरौना निवासी गुर्च(गिलोय)खरीदार रजनीश यादव ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रो से आ रही गुर्च(गिलोय) को वह चार सौ रुपया कुंतल के हिसाब से खरीदते है खरीदने के बाद आ एक इंच के टुकड़े काटकर सुखाते है जिसके बाद सहादतगंज लखनऊ में पांच हजार रुपया कुंतल के हिसाब से बिक्री करते है।इस गुर्च ह से जिससे एनर्जिक दवाये बनाई जाती है

आयुर्वेद की अमृता यानी गुर्च(गिलोय) जानिए विशेष लाभ

पिछले दिनों जब स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ा तो लोग आयुर्वेद की शरण में पंहुचे। इलाज के रूप में गिलोय का नाम खासा चर्चा में आया। गुर्च(गिलोय) जिसका वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कोर्डीफोलिया है, का आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसके खास गुणों के कारण इसे अमृत के समान समझा जाता है और इसी कारण इसे अमृता भी कहा जाता है। प्राचीन काल से ही इन पत्तियों का उपयोग विभिन्न आयुर्वेदिक दवाइयों में एक खास तत्व के रुप में किया जाता है।
लंबे समय से चलने वाले बुखार के इलाज में गिलोय काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह शरीर में ब्लड प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाता है जिससे यह डेंगू तथा स्वाइन फ्लू के निदान में बहुत कारगर है। इसके दैनिक इस्तेमाल से मलेरिया से बचा जा सकता है।
शरीर में पाचनतंत्र को सुधारने में गिलोय काफी मददगार होता है। गिलोय के चूर्ण को आंवला चूर्ण या मुरब्बे के साथ खाने से गैस में फायदा होता है।
गिलोय से शरीर में शुगर और लिपिड के स्तर को कम करने का खास गुण होता है। गिलोय चूर्ण को अश्वगंधा और शतावरी में मिलाकर खाने से याददाश्त बढ़ाने का गुण होता है।

गुर्च(गिलोय) से होने वाले शारीरिक फायदे की ओर देखें :

रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
ज्वर से लड़ने के लिए उत्तम औषधी
पाचन क्रिया करता है दुरुस्त
बवासीर का भी इलाज है गिलोय
डॉयबिटीज का उपचार
उच्च रक्तचाप को करे नियंत्रित
अस्थमा का बेजोड़ इलाज
आंखों की रोशनी बढ़ाने हेतु
सौंदर्यता के लिए भी है कारगार
खून से जुड़ी समस्याओं को भी करता है दूर
दांतों में पानी लगना
रक्तपित्त (खूनी पित्त)
खुजली
मोटापा
हिचकी
कान में दर्द
संग्रहणी (पेचिश)
कब्ज
एसिडिटी
खून की कमी (एनीमिया)
हृदय की दुर्बलता
हृदय के दर्द
बवासीर, कुष्ठ और पीलिया
मूत्रकृच्छ (पेशाब करने में कष्ट या जलन)
रक्तप्रदर:
चेहरे के दाग-धब्बे
सफेद दाग
जोड़ों के दर्द (गठिया)*
पेट के रोग*
वातज्वर*
शीतपित्त (खूनी पित्त)
जीर्णज्वर (पुराने बुखार)
पेचिश (संग्रहणी)
नेत्रविकार (आंखों की बीमारी)
क्षय (टी.बी.)
खूनी कैंसर
आन्त्रिक (आंतों) के बुखार
अजीर्ण (असाध्य) ज्वर
पौरुष शक्ति
वात-कफ ज्वर
दमा (श्वास का रोग)

सावधानी:-गुर्च(गिलोय)के पत्तो का सेवन न करके डंठल का प्रयोग करना चाहिए।गुर्च,गिलोय के ज्यादा सेवन से मोह में छाला पड़ सकते है

मामले में फारेस्टर सुनील त्रिपाठी से जब बात की गई तो बताया कि गुर्च(गिलोय) खरीद और बिक्री के लिए कोई लायसेंस होता है नही इसकी जानकारी नही है पूरे मामले की जानकारी करते है

विधि:-

रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है –गुर्च(गिलोय) हमारे लीवर तथा किडनी में पाए जाने वाले रासायनिक विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, हमारे शरीर में होनेवाली बीमारीयों के कीटाणुओं से लड़कर लीवर तथा मूत्र संक्रमण जैसी समस्याओं से हमारे शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है।

ज्वर से लड़ने के लिए उत्तम औषधी – गुर्च(गिलोय) हमारे शरीर में रक्त के प्लेटलेट्स की मात्रा को बढ़ाता है जो कि किसी भी प्रकार के ज्वर से लड़ने में उपयोगी साबित होता है। डेंगु जैसे ज्वर में भी गिलोय का रस बहुत ही उपयोगी साबित होता है। यदि मलेरिया के इलाज के लिए गिलोय के रस तथा शहद को बराबर मात्रा में मरीज को दिया जाए तो बडी सफलता से मलेरिया का इलाज होने में काफी मदद मिलती है।

पाचन क्रिया करता है दुरुस्त- पाचनतंत्र को सुनियमित बनाने के लिए यदि एक ग्राम गिलोय के पावडर को थोडे से आंवला पावडर के साथ नियमित रूप से लिया जाए तो काफी फायदा होता है।

बवासीर का भी इलाज है गिलोय – बवासीर से पीडित मरीज को यदि थोडा सा गिलोय का रस छांछ के साथ मिलाकर देने से मरीज की तकलीफ कम होने लगती है।

डॉयबिटीज का उपचार – शरीर में रक्त में पाए जाने वाली शुगर की मात्रा अधिक है तो गिलोय के रस को नियमित रूप से पीने से यह मात्रा भी कम होने लगती है।

उच्च रक्तचाप को करे नियंत्रित – गुर्च(गिलोय) हमारे शरीर के रक्तचाप को नियमित करता है।

अस्थमा का बेजोड़ इलाज– अस्थमा के उपर्युक्त लक्षणों को दूर करने का सबसे आसान उपाय है, गुर्च (गिलोय) का प्रयोग करना। जी हाँ अक्सर अस्थमा के मरीजों की चिकित्सा के लिए गिलोय का प्रयोग बडे पैमाने पर किया जाता है

आंखों की रोशनी बढ़ाने हेतु :- गुर्च(गिलोय) के कुछ पत्तों को पानी में उबालकर ,पानी ठंडा होने पर आंखों की पलकों पर नियमित रूप से लगाने से काफी फायदा होता है। बिना चश्मा पहने भी बेहतर रूप से दिखने लगता है।

सौंदर्यता के लिए भी है कारगार – गुर्च (गिलोय) का उपयोग करने से हमारे चेहरे पर से काले धब्बे, कील मुहांसे तथा लकीरें कम होने लगती हैं। चेहरे पर से झुर्रियाँ भी कम होने लगती है।

खून से जुड़ी समस्याओं को भी करता है दूर :- गुर्च के नियमित इस्तेमाल करने से शरीर में खून की मात्रा बढने लगती है, तथा गुर्च (गिलोय) हमारे खून को भी साफ करने में बहुत ही लाभदायक है।

*दांतों में पानी लगना*: गिलोय और बबूल की फली समान मात्रा में मिलाकर पीस लें और सुबह-शाम नियमित रूप से इससे मंजन करें इससे आराम मिलेगा।

रक्तपित्त (खूनी पित्त): 10-10 ग्राम मुलेठी, गिलोय, और मुनक्का को लेकर 500 मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं। इस काढ़े को 1 कप रोजाना 2-3 बार पीने से रक्तपित के रोग में लाभ मिलता है।

खुजली: हल्दी को गिलोय के पत्तों के रस के साथ पीसकर खुजली वाले अंगों पर लगाने और 3 चम्मच गिलोय का रस और 1 चम्मच शहद को मिलाकर सुबह-शाम पीने से खुजली पूरी तरह से खत्म हो जाती है।

मोटापा: नागरमोथा, हरड और गिलोय को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। इसमें से 1-1 चम्मच चूर्ण शहद के साथ दिन में 3 बार लेने से मोटापे के रोग में लाभ मिलता है।

हिचकी: सोंठ का चूर्ण और गिलोय का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर सूंघने से हिचकी आना बंद हो जाती है।

कान में दर्द: गिलोय के पत्तों के रस को गुनगुना करके इस रस को कान में बूंद-बूंद करके डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

संग्रहणी (पेचिश): अती, सोंठ, मोथा और गिलोय को बराबर मात्रा में लेकर पानी के साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को 20-30 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पीने से मन्दाग्नि (भूख का कम लगना), लगातार कब्ज की समस्या रहना तथा दस्त के साथ आंव आना आदि प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं।

कब्ज : गुर्च(गिलोय) का चूर्ण 2 चम्मच की मात्रा गुड़ के साथ सेवन करें इससे कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है।

एसीडिटी: गुर्च(गिलोय) के रस का सेवन करने से ऐसीडिटी से उत्पन्न अनेक रोग जैसे- पेचिश, पीलिया, मूत्रविकारों (पेशाब से सम्बंधित रोग) तथा नेत्र विकारों (आंखों के रोग) से छुटकारा मिल जाता है। गिलोय, नीम के पत्ते और कड़वे परवल के पत्तों को पीसकर शहद के साथ पीने से अम्लपित्त समाप्त हो जाती है।

खून की कमी (एनीमिया): गुर्च(गिलोय) का रस शरीर में पहुंचकर खून को बढ़ाता है और जिसके फलस्वरूप शरीर में खून की कमी (एनीमिया) दूर हो जाती है।

हृदय की दुर्बलता: गुर्च(गिलोय) के रस का सेवन करने से हृदय की निर्बलता (दिल की कमजोरी) दूर होती है। इस तरह हृदय (दिल) को शक्ति मिलने से विभिन्न प्रकार के हृदय संबन्धी रोग ठीक हो जाते हैं।

हृदय के दर्द: गुर्च(गिलोय) और काली मिर्च का चूर्ण 10-10 ग्राम की मात्रा में मिलाकर इसमें से 3 ग्राम की मात्रा में हल्के गर्म पानी से सेवन करने से हृदय के दर्द में लाभ मिलता है।

बवासीर, कुष्ठ और पीलिया: 7 से 14 मिलीलीटर गुर्च(गिलोय) के तने का ताजा रस शहद के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से बवासीर, कोढ़ और पीलिया का रोग ठीक हो जाता है।

मूत्रकृच्छ (पेशाब करने में कष्ट या जलन): गुर्च(गिलोय) का रस वृक्कों (गुर्दे) क्रिया को तेज करके पेशाब की मात्रा को बढ़ाकर इसकी रुकावट को दूर करता है। वात विकृति से उत्पन्न मूत्रकृच्छ (पेशाब में जलन) रोग में भी गिलोय का रस लाभकारी है।

रक्तप्रदर: गुर्च(गिलोय) के रस का सेवन करने से रक्तप्रदर में बहुत लाभ मिलता है।

चेहरे के दाग-धब्बे: गुर्च(गिलोय) की बेल पर लगे फलों को पीसकर चेहरे पर मलने से चेहरे के मुंहासे, फोड़े-फुंसियां और झाइयां दूर हो जाती है।

सफेद दाग सफेद दाग के रोग में 10 से 20 मिलीलीटर गुर्च(गिलोय) के रस को रोजाना 2-3 बार कुछ महीनों तक सफेद दाग के स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।

पेट के रोग: 18 ग्राम ताजी गुर्च(गिलोय) 2 ग्राम अजमोद और छोटी पीपल, 2 नीम की सींकों को पीसकर 250 मिलीलीटर पानी के साथ मिट्टी के बर्तन में फूलने के लिए रात के समय रख दें तथा सुबह उसे छानकर रोगी को रोजाना 15 से 30 दिन तक पिलाने से पेट के सभी रोगों में आराम मिलता है।

जोड़ों के दर्द (गठिया): गुर्च(गिलोय)के 2-4 ग्राम का चूर्ण, दूध के साथ दिन में 2 से 3 बार सेवन करने से गठिया रोग ठीक हो जाता है।

वातज्वर: गम्भारी, बिल्व,अरणी, श्योनाक (सोनापाठा), तथा पाढ़ल इनके जड़ की छाल तथा गिलोय, आंवला, धनियां ये सभी बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। इसमें से 20-30 ग्राम काढ़े को दिन में 2 बार सेवन करने से वातज्वर ठीक हो जाता है।

शीतपित्त (खूनी पित्त): 10 से 20 ग्राम गुर्च(गिलोय) के रस में बावची को पीसकर लेप बना लें। इस लेप को खूनी पित्त के दानों पर लगाने तथा मालिश करने से शीतपित्त का रोग ठीक हो जाता है।

जीर्णज्वर (पुराने बुखार): जीर्ण ज्वर या 6 दिन से भी अधिक समय से चला आ रहा बुखार व न ठीक होने वाले बुखार की अवस्था में उपचार करने के लिए 40 ग्राम गुर्च (गिलोय) को अच्छी तरह से पीसकर, मिटटी के बर्तन में 250 मिलीलीटर पानी में मिलाकर रात भर ढककर रख दें और सुबह के समय इसे मसलकर छानकर पी लें। इस रस को रोजाना दिन में 3 बार लगभग 20 ग्राम की मात्रा में पीने से लाभ मिलता है।

पेचिश (संग्रहणी): 20 ग्राम पुनर्नवा, कटुकी, गुर्च(गिलोय)नीम की छाल, पटोलपत्र, सोंठ, दारुहल्दी, हरड़ आदि को 320 मिलीलीटर पानी में मिलाकर इसे उबाले जब यह 80 ग्राम बच जाए तो इस काढ़े को 20 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पीने से पेचिश ठीक हो जाती है।

नेत्रविकार (आंखों की बीमारी): लगभग 11 ग्राम गुर्च(गिलोय) के रस में 1-1 ग्राम शहद और सेंधानमक मिलाकर, इसे खूब अच्छी तरह से गर्म करें और फिर इसे ठण्डा करके आंखो में लगाने से आंखों के कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं। इसके प्रयोग से पिल्ल, बवासीर, खुजली, लिंगनाश एवं शुक्ल तथा कृष्ण पटल आदि रोग भी ठीक हो जाते हैं।

क्षय (टी.बी.): गुर्च(गिलोय)कालीमिर्च, वंशलोचन, इलायची आदि को बराबर मात्रा में लेकर मिला लें। इसमें से 1-1 चम्मच की मात्रा में 1 कप दूध के साथ कुछ हफ्तों तक रोजाना सेवन करने से क्षय रोग दूर हो जाता है।कालीमिर्च, गुर्च(गिलोय) का बारीक चूर्ण, छोटी इलायची के दाने, असली वंशलोचन और भिलावा समान भाग कूट-पीसकर कपड़े से छान लें। इसमें से 130 मिलीग्राम की मात्रा मक्खन या मलाई में मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से टी.बी. रोग ठीक हो जाता है।

वातरक्त: गुर्च(गिलोय) के 5-10 मिलीमीटर रस अथवा 3-6 ग्राम चूर्ण या 10-20 ग्राम कल्क अथवा 40-60 ग्राम काढ़े को प्रतिदिन निरन्तर कुछ समय तक सेवन करने से रोगी वातरक्त से मुक्त हो जाता है।

खूनी कैंसर: रक्त कैंसर से पीड़ित रोगी को गुर्च(गिलोय) के रस में जवाखार मिलाकर सेवन कराने से उसका रक्तकैंसर ठीक हो जाता है।

आन्त्रिक (आंतों) के बुखार: 5 ग्राम गुर्च(गिलोय) का रस को थोड़े से शहद के साथ मिलाकर चाटने से आन्त्रिक बुखार ठीक हो जाता है।

अजीर्ण (असाध्य) ज्वर: गुर्च(गिलोय) छोटी पीपल, सोंठ, नागरमोथा तथा चिरायता इन सबा को पीसकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को पीने से अजीर्णजनित बुखार कम होता है।

पौरुष शक्ति : गुर्च(गिलोय)बड़ा गोखरू और आंवला सभी बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से 5 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन मिश्री और घी के साथ खाने से पौरूष शक्ति में वृद्धि होती है।

वात-कफ ज्वर: वात के बुखार होने के 7 वें दिन की अवस्था में गिलोय, पीपरामूल, सोंठ और इन्द्रजौ को मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से लाभ मिलता है।

दमा (श्वास का रोग): गुर्च(गिलोय)की जड़ की छाल को पीसकर मट्ठे के साथ लेने से श्वास-रोग ठीक हो जाता है। 6 ग्राम गिलोय का रस, 2 ग्राम इलायची और 1 ग्राम की मात्रा में वंशलोचन शहद में मिलाकर खाने से क्षय और श्वास-रोग ठीक हो जाता है।

सावधानी:-गुर्च(गिलोय)के पत्तो का सेवन न करके डंठल का प्रयोग करना चाहिए।गुर्च,गिलोय के ज्यादा सेवन से मोह में छाला पड़ सकते है

मामले में फारेस्टर सुनील त्रिपाठी से जब बात की गई तो बताया कि गुर्च(गिलोय) खरीद और बिक्री के लिए कोई लायसेंस होता है नही इसकी जानकारी नही है पूरे मामले की जानकारी करते है

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