मेडिकल प्रोफेशन के लिए खतरा तो नही बन रहे अस्पताल

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मेडिकल प्रोफेशन के लिए खतरा तो नही बन रहे अस्पताल

कानपुर (शिव शंकर सविता)- धरती पर भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों के प्रोफेशन पर चंद अस्पताल खतरा साबित हो रहे है। अभी हाल में ही केशवपुरम के लाइफ ट्रान अस्पताल में मरीज का भारी भरकम बिल तैयार कर दिया गया। जब तीमारदारों ने बिल के अधिक होने की शिकायत अस्पताल प्रबंधन से की तो तीमारदारों से अस्पताल प्रबंधन ने बदसूलकी करनी चाही, जिसपर तीमारदारों ने अस्पताल परिसर में हंगामा कर दिया और लिखित शिकायत मुख्य चिकित्सा अधिकारी से की जिसपर सीएमओ ने जांच कर कार्यवाही का आश्वासन दिया। ये पहला मामला नही है जिसपर अस्पताल प्रबंधन ने मरीजो से अधिक बिल नही वसूला है। सूत्रों के अनुसार जून जुलाई माह में चित्रकूट निवासी एक मरीज अस्पताल में गुर्दा की समस्या के चलते एडमिट कराया था। एडमिट होने के 3 दिन में ही अस्पताल ने तीस हजार का बिल तीमारदार को थमा दिया जिसपर तीमारदार में जानकारी लेनी चाही की इतना लंबा बिल किस चीज का है तो अस्पताल ने साफ तौर पर कहा कि जब प्राइवेट अस्पताल में इलाज नही करवा सकते हो तो मरीज को एडमिट क्यों करवाते हो? किसी खैराती अस्पताल में जाकर इलाज करवाओ। जब तीमारदार ने इसकी शिकायत सीएमओ से करने की बात कही तो अस्पताल प्रबंधन ने साफ शब्दों में कह दिया कि शिकायत चाहे सीएमओ से करो या स्वास्थ्य मंत्री से कोई कुछ नही बिगाड़ पाएगा। इतने अधिक बिल और प्रबंधन का बेरुखा व्यवहार देखकर तीमारदार ने मरीज को डिस्चार्ज कराना ही उचित समझा। ऐसे न जाने कितने मामले होंगे जो प्रकाश में नही आये है और प्रकाश में नही आने पर उनपर कोई कार्यवाही नही हुई है कार्यवाही नही होने पर इन अस्पतालों का मनोबल बढ़ता है। सवाल ये उठता है कि इन अस्पतालों को धन उगाही करने का अधिकार कौन देता है और शिकायत होने पर इन अस्पतालों के विरुद्ध कार्यवाही क्यों नही होती। दूसरा पक्ष जानने के लिए अस्पताल प्रबंधन की अंजली पांडेय को फ़ोन किया गया पर वो उपलब्ध नही हुई।

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